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खुदीराम बोस की जन्मभूमि की माटी और बूढ़ी गंडक के जल से बंगाल में रोपे जा रहे पौधे

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Rajesh Kumar Singh
4 मिनट पढ़ें 59 पठन
खुदीराम बोस की जन्मभूमि की माटी और बूढ़ी गंडक के जल से बंगाल में रोपे जा रहे पौधे
मिदनापुर की माटी और बूढ़ी गंडक नदी का पानी लेकर पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में चलाया जा रहा पौधारोपण अभियान।
मिदनापुर की माटी और बूढ़ी गंडक नदी का पानी लेकर पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में चलाया जा रहा पौधारोपण अभियान।

मुजफ्फरपुर (नव संदेश डिजिटल)। क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने जिस दौर में युवाओं के भीतर आजादी की अलख जगाई थी, उसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। अब उनकी कर्मभूमि मुजफ्फरपुर और जन्मभूमि मिदनापुर की मिट्टी व पानी के जरिए पर्यावरण संरक्षण के साथ उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है। मिदनापुर की माटी और बूढ़ी गंडक नदी का पानी लेकर पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में पौधरोपण अभियान 

खुदीराम बोस की जन्मभूमि मिदनापुर में पिछले दो वर्षों से ‘हरित खुदीराम बोस अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के तहत खुदीराम बोस के गिरफ्तारी स्थल, फांसी स्थल और चिताभूमि स्थल से मिट्टी तथा बूढ़ी गंडक नदी का पानी मुजफ्फरपुर से मिदनापुर ले जाकर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य मिदनापुर की नई पीढ़ी को अमर शहीद खुदीराम बोस के त्याग, साहस और देशभक्ति की कहानी से रूबरू कराना है। अभियान के दौरान स्कूलों और विभिन्न संस्थानों में पौधारोपण के साथ परिचर्चा भी आयोजित की जाती है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को खुदीराम बोस के जीवन, संघर्ष और उनके बलिदान की जानकारी दी जाती है। साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जाती है।

अशोक, अमलतास और पीपल के पौधे लगाए जा रहे

अभियान के तहत मुख्य रूप से अशोक, अमलतास और पीपल के पौधे लगाए जा रहे हैं। ‘हरित खुदीराम बोस अभियान’ चलाने वाले बंगाल निवासी समाजसेवी अरिंदम भौमिक बताते हैं कि नई पीढ़ी को खुदीराम बोस की वीरता की कहानी से जोड़ना ही अभियान का मुख्य उद्देश्य है। वे हर वर्ष अमर शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर आकर खुदीराम बोस के गिरफ्तारी स्थल, फांसी स्थल और चिताभूमि से मिट्टी लेकर मिदनापुर जाते हैं। वहां की मिट्टी में बलिदान भूमि की मिट्टी तथा यहां के बूढी गंडक नदी का पानी मिलाकर पौधारोपण किया जाता है।

अपने घर पर ‘खुदीराम बोस हरित नर्सरी’ भी बनाई

उन्होंने कहा कि यहां के बूढ़ी गंडक नदी के पानी का भी इस अभियान में विशेष महत्व है। बताया जाता है कि खुदीराम बोस की अस्थियां बूढ़ी गंडक में विसर्जित की गई थीं। इसी कारण नदी का पानी भी मिदनापुर ले जाया जाता है। करीब 500 लीटर क्षमता वाले ड्रम में इस पानी को एकत्र कर पौधरोपण में इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी के कलश में पौधे के साथ बलिदान भूमि की मिट्टी और बोतल में बूढ़ी गंडक का पानी लोगों को वितरित किया जाता है। अरिंदम भौमिक ने अपने घर पर ‘खुदीराम बोस हरित नर्सरी’ भी बनाई है। जून, जुलाई और अगस्त के दौरान प्रतिदिन एक से दो पौधे स्कूलों में लगाए जाते हैं। उनके घर से भी लोग पौधे, मिट्टी और पानी लेकर जाते हैं।

मिदनापुर के तत्कालीन एसपी एवं आईपीएस अधिकारी आलोक रजौरिया ने चंदन का पौधा लगाकर अभियान का शुभारंभ किया था

अरिंदम के अनुसार, जिस मिदनापुर कॉलेजिएट स्कूल में अमर बलिदानी खुदीराम बोस ने पढ़ाई की थी, वहीं से अभियान की शुरुआत की गई थी। मिदनापुर के तत्कालीन एसपी एवं आईपीएस अधिकारी आलोक रजौरिया ने चंदन का पौधा लगाकर अभियान का शुभारंभ किया था। इसके बाद पश्चिमी मिदनापुर की तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रश्मि कमल ने पौधारोपण कर अभियान को आगे बढ़ाया। अभियान में अरिंदम भौमिक की पत्नी रिंकी भौमिक सहित परिवार के अन्य सदस्यों और युवाओं की टोली का सहयोग मिल रहा है। अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार अब तक तीन दर्जन से अधिक स्कूलों में पांच हजार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रयास नहीं है, बल्कि अमर शहीद खुदीराम बोस की स्मृति को जीवित रखने और उनके त्याग, साहस एवं देशभक्ति के आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी है। मुजफ्फरपुर की माटी और बूढ़ी गंडक का जल लेकर बंगाल में लगाए जा रहे पौधे दोनों क्षेत्रों के ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध को भी नई पीढ़ी के सामने ला रहे हैं।

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