किसी भी ज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने से पूर्व उसकी वैज्ञानिक एवं अकादमिक समीक्षा आवश्यक : डॉ शांतनु राय
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Rajesh Kumar Singh
राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति का विकल्प जन शिक्षा नीति विषयक कार्यशाला में विद्वानों ने औचित्य पर उठाये सवाल
मुजफ्फरपुर (दैनिक नव संदेश)। आईआईटी मद्रास के पूर्व प्राध्यापक प्रो.(डॉ.) शांतनु राय ने कहा है कि प्राचीन भारत में ज्ञान के अभूतपूर्व विकास हुए। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा तथाकथित भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक विज्ञान के समकक्ष प्रस्तुत करने से शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साक्ष्य-आधारित अध्ययन कमजोर हो सकता है। इसलिए किसी भी ज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने से पूर्व उसकी वैज्ञानिक एवं अकादमिक समीक्षा आवश्यक है।
डॉ राय शनिवार को ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमिटी, मुजफ्फरपुर चैप्टर के तत्वावधान में स्थानीय आर.डी.एस. कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विकल्प : जन शिक्षा नीति विषय पर आयोजित कार्यशाला को मुख्य वकता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ऐसे समय में लाई गई, जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से पीड़ित थी तथा देश के शिक्षाविदों से समुचित सुझाव एवं राय लिए बिना इसे लागू किया गया। इसी कारण आॅल इंडिया सेव एजुकेशन कमिटी ने देशभर के शिक्षकों, शिक्षाविदों, प्रोफेसरों और शिक्षा-प्रेमियों से सुझाव प्राप्त कर जन-संसद के माध्यम से जन शिक्षा नीति-2026 पारित की।
इस जन शिक्षा नीति-2026 को लागू कराने के लिए समिति पूरे देश में अभियान चला रही है। इससे पूर्व कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो डॉ अमरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि शिक्षा बजट बढ़ाए बिना देश में शिक्षा सुधार की बात करना बेईमानी है। जो भी देश आगे बढ़ रहे हैं, उन्होंने शिक्षा पर अधिक से अधिक ध्यान दिया है। उन्होंने जन शिक्षा नीति-2026 की सराहना करते हुए सरकार से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया। एसआरपीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो डॉ एस के पॉल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का निजीकरण भारत जैसे गरीब देश के लिए अभिशाप है, जहाँ बड़ी आबादी शिक्षा पर न्यूनतम राशि भी खर्च करने की स्थिति में नहीं है। सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक श्री बी के चौधरी ने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए अत्यंत कठिन और अन्यायपूर्ण समय है। नई शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण, सांप्रदायीकरण एवं केंद्रीकरण को बढ़ावा देने वाली नीति है।
शिक्षा आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता शाहिद कमाल ने कहा कि शिक्षा सबके लिए होनी चाहिए। इस विषय पर आजादी के आंदोलन के दौरान व्यापक विमर्श हुए हैं। नई शिक्षा नीति के माध्यम से गरीबों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। वही कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए रामप्रीत राय ने कहा कि आॅल इंडिया सेव एजुकेशन कमिटी जन शिक्षा नीति - 2026 को लागू कराने के लिए व्यापक आंदोलन संगठित करेगी तथा पूरे राज्य में हस्ताक्षर अभियान चलाकर 26 सितंबर 2026 को राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन के माध्यम से हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा जाएगा।
कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमिटी, मुजफ्फरपुर चैप्टर के सह संयोजक आशुतोष कुमार ने किया। कार्यशाला में सामाजिक कार्यकर्ता अमरनाथ आजाद, सेवानिवृत्त शिक्षक ललन भगत, शिक्षक कुंदन कुमार, सुनील कुमार राम, सुभाष कुमार, चंदन कुमार तथा शोधार्थी ज्योति कुमारी, रामाश्रय राय, डॉ मीरा कुमारी, विनय कुमार, सुमन कुमार, कुमारी रेणु, महेश्वर प्रसाद सिंह, जवाहर लाल सिंह, रामेश्वर राम, आदर्श परमार, अरुण कुमार, अमन कुमार, अरविंद कुमार, किशोर कुमार, अमित रंजन, प्रमोद कुमार, सतनारायण ठाकुर, मोहम्मद एहसान, सुरेश पंडित, सुमन कुमार सहित अनेक शिक्षक एवं शिक्षा-प्रेमी उपस्थित थे।
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